Thursday, November 22, 2018

مارادونا قريب من ضم أسرع رجل في العالم إلى فريقه

ذكرت العديد من التقارير الإعلامية أن نادي دورادوس دي سينالوا المكسيكي، الذي يدربه أسطورة كرة القدم الأرجنتينية دييغو مارادونا، قريب من التعاقد مع أسرع رجل في العالم.
وذكرت صحيفة "ماركا" الإسبانية أن بولت قريب من اللعب تحت قيادة مارادونا في النادي المكسيكيولم يتمكن بولت من التوصل لاتفاق مع نادي سنترال كوست مارينرز الأسترالي بسبب عدم تواجد مشاركة مالية من طرف ثالث.
وسجل بولت أول هدفين خلال مسيرته الكروية في مباراة مع النادي الأسترالي في الـ12 من أكتوبر الماضي.
والتجربة مع النادي المكسيكي ستكون الأحدث في الاختبارات الكروية للعداء الأسطوري السابق المتوج بثماني ميداليات ذهبية و11 لقبا عالميا في مضمار ألعاب القوى، في إطار سعيه لتحقيق حلم خوض مسيرة احترافية في عالم كرة القدم.
كشفت الحسناء الروسية إيليزافيتا توكتاميشيفا، سر عرض "الستريبتيز" الذي قامت به خلال العروض الختامية الاستعراضية لجائزة "غران بري" للتزحلق الفني على الجليد في مرحلتي كندا واليابان.
وكتبت توكتاميشيفا مازحة عبر حسابها الرسمي في تويتر: "هل تتساءلون لماذا يتعرى عدوعادت خلال جائزة اليابان ونفذت العرض ذاته، بعد أن اشتهر العرض بشكل كبير ولاقى رواجا واسعا بين معجبي هذا النوع من الرياضة.
وفي جائزة موسكو التي اختتمت مؤخرا، قامت صوفيا إيفروكيموفا بنزع سترتها خلال الفقرة التي قدمتها مع إيغور بازين في العرض الختامي الاستعراضي في فئة الثنائي.
د من المتزلجين الروس، لأنه وبكل بساطة في روسيا الجو حار مع أننا في أواخر شهر نوفمبر، وحتى الآن لم تتساقط الثلوج"ونفذت توكتاميشيفا عرض "الستريبتيز" في اليوم الختامي الاستعراضي لجائزة كندا الذي توّجت بذهبيتها، بأداء رقصة على إيقاع أغنية بريتني سبيرز " "، متقمصة شخصية مضيفة طيران، تماما مثل سبيرز في فيديو كليب الأغنية.
توصلت نجمة كرة المضرب الأمريكية فينوس وليامز إلى تسوية قضية مقتل جيروم بارسون في حادث سير كانت ضالعة فيه العام الماضي، حسب تقارير صحفية أمريكية.
وأوردت وسائل إعلام أمريكية عدة منها شبكة "فوكس نيوز"، أن فينوس وليامز "توصلت إلى تسوية في دعوى القتل المرتبطة بحادث السير".
وكانت عائلة الضحية الذي قضى في سن الـ78، قد تقدمت بدعوى قتل بحق وليامز البالغة 38 عاما، على خلفية اصطدام سيارتها بسيارته في مدينة بالم بيتش بولاية فلوريدا في الـ9 من يونيو 2017.
ولم توجه الشرطة أي اتهام لفينوس أو لسائقة السيارة الأخرى ليندا بارسون أرملة جيروم، والبالغة من العمر 68 عاما.
وأفاد تقرير الشرطة حينها بأن وليامز كانت تقود "بشكل قانوني"، وأن سيارة ثالثة مخالفة دفعتها إلى التوقف عند أحد التقاطعات، قبل أن تصطدم سيارة بارسون بسيارتها.
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وأشارت التقارير الصحفية إلى أن هذه التسوية تم التوصل إليها الأسبوع الماضي، ولم يكشف مضمون بنودها.
وأدى الحادث إلى إصابة جيروم بارسون في الرأس ووفاته بعد أسبوعين متأثرا بجروحه.
وبعد وفاته، كتبت فينوس عبر حسابها على موقع "فيسبوك": "أنا منهارة ومحطمة القلب بسبب هذا الحادث ... أقدم تعزيتي القلبية لعائلة وأصدقاء جيروم بارسون"

Tuesday, November 6, 2018

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

बिहार में सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में बड़ी संख्या में बीजेपी के साथ-साथ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और नेता गिरफ़्तार किए गए. ग़ौर करने वाली बात ये है कि हिंदू संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पुलिस और प्रशासन से नाराज़गी है.
क्या ये नीतीश कुमार की सख़्ती और सांप्रदायिक हिंसा पर उनके रुख़ को दिखाती है. जानकार थोड़ा 'हाँ' और थोड़ा 'ना' कहते हैं.
नचिकेता नारायण कहते हैं, "बिहार के जिन इलाक़ों में हिंसा हो रही थी, वहाँ कार्रवाई से प्रशासन पीछे नहीं हटा. उस दौरान प्रशासन के हाथ नहीं बांधे गए थे. हिंसा के पैटर्न को नीतीश कुमार ने डिकोड तो कर लिया है, लेकिन वो दाँव खेल रहे हैं कि देखते हैं कहाँ तक चलता है."
शायद यही वजह है कि नीतीश इस मुद्दे पर बीजेपी का कभी खुलकर विरोध नहीं करते. गिरिराज सिंह जब हिंसा भड़काने के अभियुक्तों से जेल में जाकर मिले, तो नीतीश ने दबी आवाज़ में एतराज़ जताया. जब अश्विनी चौबे के बेटे पुलिस और प्रशासन से लुका-छिपा का खेल खेल रहे थे, उस समय भी नीतीश की आवाज़ धीमी ही थी.किन उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) का कहना है कि सांप्रदायिकता के मुद्दे पर उनकी पार्टी कभी समझौता नहीं करती.
पार्टी प्रवक्ता अजय आलोक कहते हैं, "सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश की गई है जिसे हमने कंट्रोल कर लिया. इसलिए इस बार दशहरे के मौक़े पर हम ख़ुद एक्स्ट्रा सजग थे. ख़ुद मुख्यमंत्री मॉनिटर कर रहे थे. मुसलमान ये कह रहे हैं कि हम उनके ख़िलाफ़ हैं क्योंकि हम बीजेपी से मिलकर सरकार चला रहे हैं और हिंदू संगठन ये कह रहे हैं कि हम उनके ख़िलाफ़ हैं. नीतीश कुमार वही काम कर रहे हैं जो राज्य के लिए ठीक है."
लेकिन रोसड़ा की मस्जिद के बाहर मिले इरशाद आलम नीतीश कुमार के रुख़ से काफ़ी नाराज़ हैं. वे कहते हैं, "प्रशासन अगर ठीक रहता तो दंगा नहीं होता. नीतीश कुमार मुसलमानों को इसलिए भरोसा दिला रहे हैं क्योंकि उन्हें मुसलमानों का वोट चाहिए. जब बिहार में 17-18 जगह दंगे हुए, तो नीतीश कुमार का एक भी स्टेटमेंट नहीं आया. वो तो मान ही नहीं रहे थे कि दंगा हुआ."
इरशाद आलम की बात इसलिए भी सच लगती है क्योंकि जनता दल (यू) के प्रवक्ता अजय आलोक ने ये मानने से इनकार किया कि बिहार में सांप्रदायिक हिंसा हुई है, वो ये कहते हैं कि सिर्फ़ सांप्रदायिक तनाव था जिसे क़ाबू में कर लिया गया.
बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय कहते हैं, "धर्म और आस्था व्यक्तिगत होती है, वो पार्टी आधारित नहीं होती है. भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता का इसमें कोई हाथ नहीं है. मामला न्यायालय में है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा."
जानकार भी मानते हैं कि बदली परिस्थितियों में चूँकि पार्टी सरकार में है, इसलिए वो खुलकर सामने नहीं आएगी और उसका काम बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन करते रहेंगे.
पीटीआई के ब्यूरो चीफ़ नचिकेता नारायण कहते हैं, "भाजपा अपने हिंदूवादी एजेंडे को फैलाने के लिए ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे सरकार की बदनामी हो. तलवार मारने के लिए नहीं, डराने और तनाव फैलाने के लिए है. धार्मिक जुलूस की आड़ में उत्तेजक नारे लगाए जाते हैं ताकि दूसरा समुदाय डर जाए."
उनका कहना है कि भारत में अब सांप्रदायिक राजनीति तनाव फैलाने तक ही सीमित रहेगी. ये बड़े पैमाने पर हिंसा तक नहीं जाएगी, क्योंकि उसके बिना काम चल जाता है और सरकार पर नाकामी के आरोप नहीं लगते.
सामाजिक कार्यकर्ता उदय का भी यही मानना है. वे कहते हैं, "ये लोग बड़ा दंगा नहीं चाहते हैं, वे चाहते हैं कि छोटी-छोटी घटनाएँ हों, टेंशन हो और टेंशन को भी सामाजिक आधार दिया जाए. ये लोगों को ग़ुस्सा दिलाते हैं, नफ़रत पैदा करते हैं."
इस पूरे घटनाक्रम में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है और वो है हिंसा में दलितों और पिछड़ों की भागीदारी. ये तथ्य भागलपुर में देखने को मिला, जहाँ बड़ी संख्या में इस समुदाय के लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी. दरअसल, आरएसएस दलितों और पिछड़ों में बड़ा अभियान चलाता रहा है.
भागलपुर में आरएसएस के नेता सुबोध विश्वकर्मा कहते हैं, "दलितों के बीच संस्कार भारती काम करती है. हम उन्हें बताते हैं कि ब्राह्मणों का विरोध मत करो, ख़ुद ब्राह्मण बन जाओ. वैसे भी बिहार में जब भी दंगे होते हैं, कटते-मरते तो अनुसूचित जनजाति, जाति और बैकवर्ड के ही लोग हैं."
सामाजिक कार्यकर्ता उदय उनकी बात को आगे बढ़ाते हैं. वे बताते हैं, "दलित और पिछड़े को समाज में नेतृत्व करने का मौक़ा नहीं मिला. तो दंगे में ही सही, उन्हें नेतृत्व सौंपा जा रहा है, उनके नेतृत्व को क़बूल किया जा रहा है. उनको लगता है कि उनकी लीडरशिप में ये कार्रवाई हो रही है. जिनको नेतृत्व करने का स्पेस नहीं मिला, वो दंगे में आगे आ जा रहे हैं. भागलपुर में 1989 में भी हुआ था और इस साल रामनवमी में भी ऐसा हुआ है."
बिहार में कुछ-कुछ महीनों के अंतराल पर होती सांप्रदायिक हिंसा और पर्व-त्यौहार के मौक़े पर बढ़ते तनाव चिंता का विषय हैं. आशंका यही है कि लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में उन्माद भड़काने की कोशिश हो सकती है क्योंकि सांप्रदायिकता की आग से सियासी कड़ाही गर्म होगी.

Wednesday, October 3, 2018

सेनापति की पत्नी का भी एलान-ए-जंग!

मिताभ बच्चन की गूंजती आवाज़ के साथ बॉलीवुड की झांसी की रानी ने किया शंखनाद!
अमिताभ बच्चन की आवाज़ के साथ एक भव्य सेट के बीच से गुज़रती दिखती हैं कंगना रनौत. ये टीज़र है 'मणिकर्णिका' फ़िल्म का जिसे गांधी जयंती पर लॉन्च किया गया है. पूरे टीज़र में कंगना रनौत झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शख़्सियत को दर्शाने की कोशिश करती हैं.
लेकिन इस फ़िल्म को शूट से टीज़र तक पहुंचते-पहुंचते कई जंग लड़नी पड़ी. विवादों का सिलसिला ऐसा चला कि अब तक ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा.
'मांझी', 'मंगल पांडे' जैसी फ़िल्में बना चुके केतन मेहता 2015 में कंगना रनौत से एक फ़िल्म का आइडिया लेकर मिले. उन्होंने कंगना को कथित तौर पर बताया कि वो रानी लक्ष्मीबाई पर फ़िल्म बनाना चाह रहे हैं. अपनी इस फ़िल्म के लिए उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के किरदार के लिए कंगना को चुना और उनसे फ़िल्म से जुड़ी लगभग हर बात शेयर की.
कंगना ने उनकी इस फ़िल्म के लिए एक प्रोड्यूसर को ढ़ूंढा और प्रोड्यूसर कमल जैन झांसी की रानी की फ़ौज में शामिल कर लिए गए. हालांकि केतन मेहता ने एक विदेशी प्रोड्यूसर को अपने साथ इस प्रोजेक्ट में जोड़ लिया था, लेकिन वह भारतीय प्रोड्यूसर की तलाश में भी थे.
और फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी केतन मेहता को उम्मीद नहीं थी. यहां उनसे हर स्तर पर इस फ़िल्म के आइडिया को लेकर बात चल ही रही थी कि उनको अख़बार के ज़रिए पता चला कि कंगना ने साउथ के डायरेक्टर क्रिश के साथ ठीक इसी आइडिया पर एक फ़िल्म की घोषणा कर दी है.
इसका पता चलते ही उन्होंने कंगना को लीगल नोटिस भेजा, लेकिन क्योंकि उन्होंने कंगना से इस फ़िल्म के बारे में केवल चर्चा की थी और किसी तरह का काग़जी लेखा-जोखा नहीं किया था तो वह कंगना के ख़िलाफ़ कुछ कर नहीं पाए. कंगना का कहना था कि उन्होंने केतन मेहता के साथ कोई फ़िल्म साइन नहीं की थी.
फिर केतन मेहता ने भी क़बूला कि फ़िल्म के सिलसिले में किसी तरह की काग़ज़ी कार्रवाई नहीं हुई थी हालांकि उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर कंगना ने ठीक नहीं किया.
अब इस सेना की टुकड़ी में प्रोड्यूसर कमल जैन, कंगना रनौत और डायरेक्टर क्रिश थे. फिर इस सेना का विस्तार हुआ और एक्टर सोनू सूद, अंकिता लोखंडे, अतुल कुलकर्णी, सुरेश ओबेरॉय भी शामिल हुए और 2017 में इस फ़िल्म की शूटिंग शुरू हुई.
मई 2017 में इस फ़िल्म का पहला पोस्टर बनारस में रिलीज़ किया गया क्योंकि झांसी की रानी का जन्म वाराणसी में हुआ था.
फ़िल्म 'मणिकर्णिका' की शूटिंग बनारस, जयपुर, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हुई.
फ़िल्म की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर क्रिश को साउथ में अपने दूसरे प्रोजेक्ट के लिए 'मणिकर्णिका' की शूटिंग से ब्रेक लेना पड़ा. उन्होंने तेलुगू सुपरस्टार और राजनेता एन.टी. रामा राव की बायोपिक के लिए इस फ़िल्म से ब्रेक लिया.
इस दौरान सेट से एक क्लैपबोर्ड की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी जिसपर डायरेक्टर के नाम पर कंगना रनौत लिखा हुआ था. इसके बाद कंगना ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि चूंकि क्रिश ब्रेक लेकर अपने दूसरे प्रोजेक्ट में लगे हुए हैं और फ़िल्म के निर्देशन का 'पैचवर्क' ही बचा हुआ है तो उसकी ज़िम्मेदारी उन्होंने संभाल ली है.
इसी दौरान सोनू सूद ने फ़िल्म छोड़ने का एलान कर दिया. सोनू सूद इस फ़िल्म में सदाशिवराव भाऊ का किरदार निभा रहे थे जो रानी लक्ष्मीबाई की सेना के सरदार सेनापति थे. सोनू सूद के फ़िल्म छोड़ने के बाद कंगना ने आरोप लगाया कि सोनू महिला के निर्देशन में शायद काम करना नहीं चाहते.
इस पर अपनी सफ़ाई देते हुए सोनू सूद ने कहा था कि 'यहां बात महिला या पुरुष डायरेक्टर बात नहीं है, बात योग्यता की है.
इसके बाद सोनू सूद रणवीर सिंह की फ़िल्म 'सिंबा' की शूटिंग में व्यस्त हो गए. हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उन्होंने बाकी बची 'मणिकर्णिका' की शूटिंग के लिए कोशिश की, लेकिन 'सिंबा' में और 'मणिकर्णिका' में उनका लुक बेहद अलग था. उन्होंने एक तारीख़ तय करने की भी सोची ताकि वो 'मणिकर्णिका' में अपने किरदार की शूटिंग पूरी कर सकें, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका.
सोनू सूद का किरदार अब ज़ीशान अय्यूब निभा रहे हैं.

Tuesday, September 11, 2018

怒江的水电建设

据《路透社》援引《中国日报》报道,中国国家发展改革委员会能源所宣布中国将很快征收酝酿已久的燃油附加税。


能源所所长韩文科说:“这一决定很快就会被宣布,其详细计划早前已提交到政府有关部门。”

是否征收燃油附加税已经讨论了十年时间,征收的燃油税将取代公路费用于建设高速公路。据专家预测,零售燃油价格将上涨25%以上。

中国燃油价格受国家管制,多年来一直低于国际价格,但是受近期原油价格下降的影响,中国油价高出国际市场价格水平。这为政府下调价格并引入燃油税创造了机会,又不会引起国内机动车驾驶者的不满。本周原油价格每桶55美元,与今年7月出现的历史最高水平每桶147美元相比,跌幅超过60%。
据《路透社》报道,伦敦的投资公司——气候变化资本集团计划投资50亿元人民币(7.32亿美元),用于中国的环境项目。在未来2-3年,它将在中国开展工业废物管理和清洁技术等方面活动。



该公司的运作经理、中国投资负责人陈家强表示,金融危机为收购资产带来了绝好机会,这是由于收购资产的价格更便宜,而且公司所有者在资产保值方面有很多困难。他说:“市场上有很多廉价资产。如果找到了合适的公司,现在正是进行商业谈判的最佳时机。”sex

该公司在全球控资16亿美元,目前正与16家中国公司就环保方面的项目进行洽谈。

近年来,中国的经济增长是以严重的环境破坏为代价的,包括工业污染、饮用水短缺以及城市严重的空气污染等。据估计,为恢复其水资源,中国将需要5年时间,耗资1万亿元(1,690亿美元)人民币。美联社》援引联合国的一项报告称,签订《京都议定书》的40个发达国家已将其温室气体排放水平降到比1990年低5%的平均水平。这表明,这些国家在现阶段已达到其承诺的2012年的目标。


但是,减排量得以实现的主要原因是上世纪90年代东欧国家的经济衰退。联合国专家警告说,2000年至2006年间发达国家和发展中国家的温室气体排放增长了2.3%,这可能会抵消之前的减少。

下月将在波兰波兹南举行的联合国气候会议将讨论如何以一项更广泛的框架取代《京都议定书》。联合国希望2009年在丹麦哥本哈根将达成一项新的全球气候条约。

 联合国驻波恩的环境署执行秘书伊夫·波尔说:“这些数据清楚地表明,波兹南的协商具紧迫性,我们需要迅速签署一应对气候变化带来的挑战的新协议。”
据《路透社》报道,美国加利福尼亚州州长阿诺德▪施瓦辛格下令为应对全球变暖引起的海平面上升作准备。加利福尼亚州是美国人口最多的州,该州有超过1,290公里的太平洋海岸线。
 
施瓦辛格政府的一行政命令要求研究2010年底前气候变化还会为加利福尼亚带来什么后果,海平面会上涨多少,加利福尼亚应作何反应。记录显示旧金山海平面在20世纪上升了18厘米。

加利福尼亚州被认为是美国政府中环境保护的先锋,该州制订了州立机动车污染标准以及二氧化碳减排法。
据《路透社》报道, 阿根廷总统克里斯蒂娜·费尔南德斯否决了一项保护该国冰川的法案, 理由是安第斯山等省份担心该法案将威胁当地经济发展。环保人士和某些官员认为该立法可以限制采矿和石油钻探活动。



阿根廷议会十月通过的这项法律本可以延缓巴瑞克黄金公司 世界上最大的金矿公司的一项价值240亿美元的金矿开采计划。这项在阿根廷与智利的边界的工程遭到智利环境保护者的强烈反对,但由于巴瑞克黄金公司承诺不破坏项目较远边界的安第斯山冰川,该项目得到了智利政府的批准。

环保运动人士谴责了阿根庭否决冰川法,这一法案被视为保护、学习和监测在全球变暖威胁下的冰川的重要工具。国家公园之友协会的副主席诺伯特·奥凡多说:“如果这些天然的水源储备能为我们所饮用、灌溉、用于工业,并帮助发电,我们认为水资源比金矿更宝贵。”

总统费尔南得斯的否决令称国内“过度”禁止采矿和石油钻探活动,并称“今后它将促进在进行这些项目时优先考虑环境等因素,用以保护环境。”
据《科学在线》报道,澳大利亚科学家发现南大洋海水酸化极点将比预期更快到来。海水酸化将使贝类海洋动物开始分解。这一基于季节变化的研究显示,最近30年来的海洋酸化不断加强。


新南威尔士大学与澳大利亚联邦科学与工业研究组织联合,对海水的pH值和化学元素碳酸盐的浓度按季节变化进行了研究,结果发表在《美国科学院院刊》。研究认为,人类活动产生的二氧化碳提高了海洋酸度,并使这一过程加快了30年。

新南威尔士大学的资深研究员本·麦克尼尔说,海洋像吸收二氧化碳的海绵。与气候变暖有关的温室气体,例如二氧化碳溶解在水中会减少海洋的pH值,使海水酸度增加。

当海水的酸度达到一定水平,翼足类(某类浮游生物)和其他由碳酸钙构成的贝壳类生物将会溶解。本·麦克尼尔说:“一旦达到了这一阶段,我们就别无其他解决办法,只有从大气中吸收二氧化碳。”
据《卫报》报道, 波音公司和新西兰航空公司的大型喷气式客机将从下月起使用麻风树作为其部分燃料来源。这些主要从莫桑比克、马拉维和坦桑尼亚生长的麻风树果实含有40%油。

将于12月3日从奥克兰起飞的新西兰航空公司的飞机将在其4个引擎中的1个使用50%的生物燃料和50%的喷气燃料 。

新西兰航空公司的执行总裁罗波· 非夫说,这些飞机可以帮助我们成为世界上最环保的航空公司。启用新一代的可持续性的燃料是我们为节约燃料和减少排放物做努力而采取的一个正确行动。

地球之友的生物燃料项目干事肯·瑞志的反应更多是警示性的。他对航空公司对减少飞机碳排放的努力给与了肯定,同时对生物燃料的环境影响表示担心。他说,即使是麻风树,也与食品涨价以及居民住宅遭破坏有联系。目前使用飞机的乘客增加,意味着仅把能源燃料转化为生物燃料是不够的。

波音公司说生产生物燃料的作物不由粮食作物种植地生产,使用的是其周边土地。
据《路透社》报道一份联合国的报告指出,亚洲工厂、烟雾、汽车以及森林砍伐造成了亚洲大陆上空形成了约3公里厚的黑云。它不仅每年危及上千人的生命,还为该地区带来了气候变暖效应的最坏影响。

这一棕黑色的受污染云层的某些组成分子将太阳光反射到地球以外,从而避免了地球的升温。然而,某些混杂的颗粒群在某些地区导致了气候变暖的加剧。

联合国环境项目负责人阿驰姆 · 斯特恩说在北京就其新报告说,黑云的一个影响是它为地球带上了一个面具,掩盖了气候变暖对地球的真正影响。

据这份报告估计,34万人由于肺、心脏以及癌症的威胁过早地死亡。

Saturday, September 1, 2018

新规有助于中国投资者履行环保责任

空气含有毒物,江中漂着死猪,环境破坏近来成为了中国人的热门话题。政府已经关闭了上百家污染工厂,银行拒绝向污染企业贷款,公众抗议也迫使不少污染项目下马。对于中国企业来说,环境风险已经成为了实实在在的商业风险。
即便是海外经营领域也是如此。由于项目破坏环境,中国的银行、矿产和水电企业不仅遭到了当地民众的抵制,更失去了数十亿美元的合同。中国投资者开始忧虑他们能否在海外市场长期立足,政府也担心环境问题会削弱中国的软实力。
 
自2006年开始,中国政府就发布了一系列意见和建议,呼吁中国企业在海外投资过程中尊重项目所在国的环境、当地社区利益以及工人权益。例如,中国官方要求投资者在东道国法律规定不完善的情况下适用中国有关法律,并要求中国的海外投资项目符合中国政府签署的国际公约。
 
中国改善其海外项目环境记录的决心从近期颁布的两份指导意见中可见一斑。2012年2月,中国银监会更新了约束中国银行环境表现的《绿色信贷指引》。《指引》规定,银行业金融机构“应当加强对拟授信的境外项目的环境和社会风险管理”并“对拟授信的境外项目公开承诺采用相关国际惯例或国际准则”。
 
就在不久前的2013年2月,商务部和环境保护部联合发布了姗姗来迟的《对外投资合作环境保护指南》。《指南》旨在指导中国企业“及时识别和防范环境风险,引导中国企业积极履行保护环境的社会责任,为中国企业树立良好的海外形象,并支持东道国的可持续发展。”
 
新颁布的《指南》并不是要阻止中国企业在海外开展项目,而是要减轻中国企业海外经营对当地环境的破坏,提高项目质量。《指南》规定企业在海外经营中应制定环保策略和管理方案,在敏感项目中要进行环境影响评估并制定降低环境影响的预案,向公众公开项目环境信息,并将环境保护作为整个供应链的考虑之一。
 
从实质上说,新颁布的《指南》与《经合组织跨国公司指南》相类似。作为对外投资者最重要的国际标准,经合组织的指南涵盖了从人权到劳资关系以及腐败的一系列话题。经合组织的指南涉及范围大于中国的指南,但与中国不同的是,经合组织并未就银行的环境责任颁布过任何具体的指导意见。
 
巴西、阿根廷等其他非经合组织成员国均已支持本国公司采用经合组织的指南。与此相比,中国不愿遵守完全由发达国家所指定的标准。算上中国新颁布的指南,国际上在这一领域已经有不少相关的规则,但中国的企业似乎仍将以本国政府的标准为准,而不会特别重视经合组织的标准。
 
除环境之外,工商企业尊重人权的责任也在近年来得到了广泛的认可。2011年,联合国人权理事会在其《工商业与人权指导原则》中确认了这一责任。联合国的指导原则规定,国有企业(包括中国的国有企业)在维护人权方面负有特殊的责任,例如通过与受影响社区的“有意义会商”保护当地社区居民的利益。
 
到目前为止,中国还没有就其海外投资者在保护人权方面的责任颁布任何指导原则。新颁布的环境指南强调需要与当地社区建立良好的关系,但并未承认任何当地社区的权益。中国和经合组织的指南都不具备约束力。但经合组织的指南允许民间社团和其他组织就违规行为向国家机关提出申诉,并以此为起点开始双方的协商和补救进程。至今为止,包括国际河流组织在内的各方已经在这一机制下提出了超过一百起申诉,揭露了许多企业的不法行为。
 
指南的执行
 
中国的《指南》并没有任何合规机制的支撑。之前的草案曾经规定银行(而并非其他企业)应该“为有争议的地方项目建立申诉机制”,但最终版本却没有将这一规定纳入其中。中国政府开始着力改善中国企业在海外经营中的环境表现当然是一件好事,但合规机制能确保新颁布的《指南》得到切实的执行。
 
一些中国企业已经采取措施,以确保他们在海外经营中能树立中国企业的积极形象。中国水利水电建设股份有限公司要求不管项目所在国法律是否有相关的规定,所有项目都要进行环境影响评估。该公司还采取了一套比新指南更严格的政策(虽然目前政策的执行仍然十分缓慢。)包括葛洲坝、中电投和工行在内的其他企业和银行尚未推出任何具体的加强企业社会责任的措施。
 
中国企业已经表示希望在湄公河、沙捞越热带雨林以及埃塞俄比亚奥莫河等地修建可能给环境造成负面影响的大型水坝。全球环境研究所已经将新颁布的《指南》译成英文,国际河流组织也已经将该文件译成西班牙语和缅甸语。世界各地的民间社团都可以依据《指南》和联合国有关人权的指导原则监督中国企业履行他们的社会责任。
 
翻译:李杨

Tuesday, August 28, 2018

मोहन की मां शांताबाई तज़ाणे किसान थीं. सितम्बर

2015 में उन्होंने खेती के लिए लिया गया कर्ज़ा न चुका पाने की वजह से ख़ुदकुशी कर ली. आज मोहन मज़दूरी करके अपने दो बच्चे और पत्नी का पेट पालते हैं. उनकी पत्नी तीसरे बच्चे से गर्भवती है. लेकिन मोहन अपने तीसरे बच्चे को किसी रिश्तेदार को गोद देने का मन बना चुके हैं. उदास आंखों से अपने छोटे बेटे को गोद में लेते हुए वह कहते हैं कि उनके पास तीसरे बच्चे को पालने के संसाधन नहीं हैं.
लेकिन मोहन के इस तीसरे बच्चे की क़िस्मत तो 2011 में उस वक़्त ही तय हो गयी थी, जब मोहन के किसान पिता बाबूराम प्रहलाद तज़ाणे ने बढ़ते कर्ज़ के कारण आत्महत्या की थी.
इसके बाद मोहन की माँ ने घर की बागडोर अपने हाथ में ली. वह किसान की भूमिका में आईं और अपनी पांच एकड़ ज़मीन पर खेती करने लगीं. पर फ़सल के ठीक दाम नहीं मिले और कर्ज़ ने उनका पीछा नहीं छोड़ा.
इस बीच उनके गांव में किसानों का आत्महत्या करना जारी रहा. तभी मार्च 2015 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस मोहन के गांव आए. गाड़ियों का इतना लम्बा काफ़िला मोहन को आज भी याद है.
“पूरे गांव में अफ़रा तफ़री मच गयी. बताया गया कि मुख्यमंत्री गांव का दौरा करेंगे और रात को भी यहां रुकेंगे. हमें लगा अब हमारी मुश्किलें कम हो जाएँगी. देवेंद्र फडनवीस मेरे घर भी आए थे. उन्होंने घर की हालत देखकर कहा कि ‘अरे, इसकी परिवार की हालत तो बहुत ख़राब है.’ फिर उन्होंने कहा कि वह मुझे मदद में कुंआ देंगे. मैंने कहा मुझे धड़क योजना में कुंआ दे दो. उन्होंने कहा- धड़क नहीं, रोज़गार योजना में देंगे. फिर रोज़गार योजना में मुझे कुंआ जारी हुआ. मैंने अपनी तरफ़ से भी कर्ज़ा ले लेकर पैसे लगाए लेकिन कुएँ में आज तक पानी नहीं है”.
‘धड़क योजना’ महाराष्ट्र सरकार की एक जन-कल्याण स्कीम है. इसके तहत किसानों को सरकारी ख़र्च पर कुंआ बनवाकर दिया जाता है. इस योजना के तहत गांव में कुंआ बनवाने के लिए ‘किसान आत्महत्या’ की घटनाओं वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है. मोहन के परिवार को ‘धड़क योजना’ की बजाय मनरेगा योजना के तहत कुंआ दिया गया. इसके तहत ज़मीन देने से लेकर मज़दूर जुटाने तक का सारा काम ग्राम पंचायत और क्षेत्र में मनरेगा के नोडल अधिकारी के पास आ गया. मोहन के अनुसार प्रशासनिक लचरता, कभी मज़दूरों की कमी तो कभी मशीनों की गैर-मौजूदगी की वजह से उनके कुंए का काम पूरा नहीं हो पाया. क़र्ज़ जस का तस बना रहा.
धड़क योजना हमको आसान पड़ती पर उसमें कुंआ मिला नहीं. मनरेगा में तो काम ठीक से होता नहीं. इसलिए कुंआ तो पूरा बना नहीं. क़र्ज़ बढ़ता ही गया. मेरी माँ खेती करती तो मुनाफा नहीं होता. 70 हज़ार निवेश करते तो 45 हज़ार मिलता. नुकसान ही नुकसान. मां परेशान रहती थी. फिर सितम्बर 2015 में उस दिन मैंने मां से पूछा कि कर्ज़ा कैसे चुकाएंगे. मां ने कहा कि वो नया कर्ज़ा लेने की कोशिश करेगी. कुछ नहीं हुआ तो हम अपनी ज़मीन किराए से खेती के लिए दे देंगे. इसी सोच में मैं खाना खाकर गांव में टहलने निकला. लौट के आया तो देखा मां घर में नहीं थी. सब जगह ढूँढा पर मां नहीं मिली. फिर गांव के बाहर के कुंए पर गया. वहां देखा कि मां की चप्पल कुंए के बाहर पड़ी थी”. शांताबाई की मौत के बाद प्रहलाद को मुआवज़ा में एक लाख रुपये मिले, जिससे उन्होंने अपना कर्ज़ा चुकाया. आज खेती के बारे में पूछने पर उनके चेहरे पर व्यंग्य में डूबी एक हंसी रहती है.
वह मुस्कुराते हुए मुझसे कहते हैं, “मैं अपनी पांच एकड़ ज़मीन अब किराए पर दे देता हूँ. ख़ुद खेती नहीं करता क्योंकि उसमें सिर्फ़ नुकसान है. मुझे रोज़ का 100 रुपया मज़दूरी मिल जाती है, उसी से अपना घर चलाता हूँ”.
अलविदा कहते हुए वह दुख में डूबी आवाज़ में जोड़ते हैं, “ज़मीन के किराए से कर्ज़ा चुका रहा हूँ. खेती करने से क्या होगा? आपके यहां आने और मेरे बारे में लिखने से क्या होगा? किसी भी चीज़ से क्या होगा? अरे मेरे घर मुख्यमंत्री आकर चले गए...फिर भी मेरी किसान माँ ने आत्महत्या कर ली. मुख्यमंत्री के आने से जब कुछ नहीं हुआ फिर किसी भी बात से क्या हो जाएगा?”
गांव छोड़ने से पहले मेरी मुलाक़ात गांव के युवा सरपंच मंगेश शंकर ज़हरीले से होती है. गांव में बढ़ती किसान आत्महत्याओं के बारे में पूछने पर वह ग़ुस्से में कहते हैं, “मुख्यमंत्री गांव में आए और सिर्फ़ पेपरबाज़ी और नाश्ता करके चले गए. मुख्यमंत्री के गांव को गोद लेने के बाद भी काम क्या हुआ- एक सड़क और एक बस स्टैंड. किसानों को जिस मदद की ज़रूरत थी, वह तो मिली ही नहीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तो मैं इतना दुखी हूं कि अब शिकायत भी नहीं करना चाहता. चुनाव से पहले उन्होंने वादा किया था कि सब किसानों का कर्ज़ा माफ़ करेंगे. अभी तक नहीं हुआ. इस गांव में 42 किसानों ने जान दी पर अब तक सिर्फ़ 12 परिवारों को ‘किसान आत्महत्या’ परिवारों को मिलने वाले लाभ मिले. बाक़ी को कागज पर सरकार ने माना ही नहीं. सिर्फ़ चाय पर चर्चा करने से किसान की समस्या ख़त्म नहीं हो जाती”.
यवतमाल गांव में मेरी मुलाक़ात क्षेत्र में किसानों के मुद्दों पर बीते एक दशक से काम कर रहे देवेंद्र राव पवार से होती है.
विदर्भ में कभी न ख़त्म होने वाली किसान आत्महत्याओं के सिलसिले के बारे में वह कहते हैं, “शर्म की बात है कि हरित क्रांति के जनक वसंत राव नाइक का ज़िला आज किसानों की क़ब्रगाह में तब्दील हो गया है. 20 मार्च 2014 को नरेंद्र मोदी यहां आए थे. उन्होंने यहां से किसानों से वादा किया कि अगर उनकी सरकार आएगी तो वह स्वामीनाथन कमीशन की सिफ़ारिशें लागू करेंगे और किसानों को 50 फीसदी मुनाफ़े पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलवाएंगे. उन्होंने कहा था कि उनके शासन में एक भी किसान आत्महत्या नहीं करेगा. लोगों ने भरोसा करके उनको चुना पर नतीजा क्या हुआ? साल में जितने दिन होते हैं, उससे भी ज़्यादा किसान यवतमाल में हर साल आत्महत्या कर रहे हैं”.
देवेंद्र ने क़र्ज़माफ़ी के लिए हाल ही में शुरू की गई महाराष्ट्र सरकार की ‘छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकर (किसान) सम्मान योजना’ का ज़िक्र भी किया. इस योजना के तहत जिन भी किसानों ने 1.5 लाख या उससे कम क़र्ज़ लिया है, उसे माफ़ किए जाने का प्रावधान है. लेकिन कागज़ों पर जन-कल्याण का मोती लगने वाली इस योजना का ज़मीन पर पालन नहीं हो रहा है.
ताज़ा उदाहरण यवतमाल के पंडरकवड़ा तहसील के वागधा गांव में रहने वाला रेणुका चौहाण का परिवार है. अपनी पांच एकड़ ज़मीन पर खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाली महिला किसान रेणुका चौहाण ने मई 2018 में ज़हर खाकर ख़ुदकुशी कर ली. उनके परिवार में उनके 3 बेटे, पति और विकलांग सास-ससुर हैं. रेणुका की मृत्यु के बाद से उनके पति भी अपनी मानसिक स्थिरता खो बैठे हैं.
रेणुका के परिवार ने खेती के लिए 60 हज़ार रुपये का क़र्ज़ लिया था लेकिन फ़सल में कीड़े लग जाने की वजह से वो कर्ज़ चुका नहीं पाए. ‘छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकर सम्मान योजना’ के तहत जब वह अपने कर्ज़ माफ़ी की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट गयीं तब उसका सिर्फ़ 15 हज़ार क़र्ज़ माफ़ किया गया.
रेणुका के सबसे बड़े बेटे अंकुश बताते हैं, “कागज़ों पर हमारा क़र्ज़ा माफ़ हो चुका था जबकि असलियत में हम पर अब भी 45 हज़ार क़र्ज़ था. जिन माइक्रो फ़ाइनेंस कम्पनियों से हमने क़र्ज़ लिया था उनके लोग घर आकर पैसे के लिए मां को सताते थे. मां को दुःख होता पर दुःख से ज़्यादा शर्म आती. अगर शिवाजी स्कीम के मुताबिक़ हमारा पूरा पैसा माफ़ हो जाता तो शायद मां बच जाती”.
जब हमने अंकुश के घर से विदा ली तब तेज़ बरसात हो रही थी. अपने छोटे से घर की छत में बने सुरागों से गिरते पानी को देखते हुए अंकुश का चेहरा अपने अनिश्चित भविष्य की तरह ही अनिश्चित लग रहा था.